संस्थापक प्रबन्धक जी का बच्चों के लिए सन्देश

बच्चों  तुम सभी जीवन में अपने लक्ष्य को अवश्य पाना चाहते होगे लेकिन चाहने से तो बात बनती नहीं, इसके लिए हमें निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता होती है तथा जीवन में कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी दिनचर्या पर ध्यान दें। हमारी दिनचर्या इसप्रकार की हो जिससे तन-मन दोनों स्वस्थ रहें। आज मैं तुम्हें तुम्हारी दिनचर्या के विषय में कुछ बताना चाहता हूँ:-

तुम्हें प्रातःकाल जल्दी उठना चाहिए परन्तु इसके लिए आवश्यक है कि तुम रात में जल्दी सो जाओ। प्रातःकाल का समय अध्ययन सहित अनेक कार्यों को करने का सबसे अधिक उपयुक्त समय है। तुमने अवश्य सुना होगा –
 ‘‘जो रात में जल्दी सोये और सुबह को जल्दी जागे
 उस बच्चे से दूर-दूर दुनिया का गम भागे’’

प्रातःकाल कुछ समय प्राणायाम, योग व व्यायाम करो। इससे दिन भर तुम्हें स्फूर्ति मिलेगी साथ ही तुम्हारी सकारात्मक सोच विकसित होगी। इस तरह तुम्हारी अनेक बुराइयाँ स्वयं दूर हो जायेंगी।

शिक्षा संस्थान की उल्लेखनीय विशेषताएँ
(Worthmentioning Characterstics of the Institution)

  • आचार्या-अभिभावक सम्पर्क
  • English Speaking, कम्प्यूटर प्रशिक्षण
  • मातृ-अभिभावक सम्मेलन, प्रशासन एवं आचार्या परिवार
  • स्वास्थ्य-परीक्षण एवं चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आचरण
  • शारीरिक कार्यक्रम/वार्षिक खेलकूद, पुस्तकालय एवं वाचनालय
  • छात्रा-सदन, प्रतिध्वनि, उमंग मेला
  • दान पात्र में छात्राओं का संग्रह

वीडियो गैलरी

  • दैनिक प्रार्थना सभा का आयोजन व शारीरिक प्रशिक्षण।
  • सुयोग्य, प्रशिक्षित एवं संस्कारित आचार्याओं द्वारा शिक्षण ।
  • योग शिक्षा एवं प्राकृतिक चिकित्सा का ज्ञान ।
  • योजनाबद्ध अभिभावक सम्पर्क, मातृ सम्मेलन तथा अभिभावक सम्मेलन
  • मनोवैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित गृह कार्य, कक्षा कार्य एवं अभ्यास कार्य ।
  • छात्रा समितियों का गठन, प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन।
  • अपनी मातृभूमि, संस्कृति, धर्म, परम्परा एवं नारियों के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्ति हेतु अनिवार्य- गीता रामायण परीक्षा, संस्कृति ज्ञान परीक्षा तथा भारत को जानो प्रतियोगिता की व्यवस्था
  • कम्प्यूटर प्रशिक्षण की व्यवस्था

मेधावी छात्राएँ

इंटरमीडिएट कला वर्ग
इंटरमीडिएट वाणिज्य वर्ग
  • दुर्गावती दुर्गाप्रसाद सनातन धर्म बालिका विद्यालय की स्थापना का संकल्प आदरणीया दुर्गावती जी (बाई जी) ने लिया था। उनसे सम्बन्धित पृष्ठभूमि का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है |